॥ जय माता दी ॥दुर्गा सप्तशती संपूर्ण मार्गदर्शिका
मार्कण्डेय पुराण अंतर्गत देवी माहात्म्य

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ विधि एवं अध्याय क्रम

माँ जगदम्बा की असीम कृपा प्राप्त करने हेतु दुर्गा सप्तशती के 700 पावन श्लोकों, 13 अध्यायों, तीन चरित्रों और नवरात्रि के 9 दिवसीय पाठ क्रम की संपूर्ण जानकारी।

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श्री दुर्गा सप्तशती क्या है?

श्री दुर्गा सप्तशती (जिसे देवी माहात्म्य अथवा चण्डी पाठ भी कहा जाता है) सनातन धर्म के प्रमुख धर्मग्रंथ मार्कण्डेय पुराण के 81वें से 93वें अध्याय तक वर्णित 700 पावन श्लोकों का संग्रह है। इसमें भगवती महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के प्राकट्य, महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ, चण्ड-मुण्ड और रक्तबीज के संहार तथा जगत-कल्याण की कथाओं का अलौकिक वर्णन है।

शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि तथा अन्य शुभ अवसरों पर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से साधक को अभय, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

दुर्गा सप्तशती के तीन चरित्र

सप्तशती के 13 अध्यायों को तीन मुख्य चरित्रों में विभक्त किया गया है:

  • प्रथम चरित्र (प्रथम अध्याय): इस चरित्र की मुख्य अधिष्ठात्री देवी महाकाली हैं। इसमें भगवान विष्णु के योगनिद्रा में होने के समय मधु और कैटभ नामक असुरों के संहार की कथा का वर्णन है।
  • मध्यम चरित्र (अध्याय 2 से 4): इस चरित्र की प्रमुख अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी हैं। इसमें देवताओं के तेज से माँ दुर्गा के प्राकट्य तथा महिषासुर के मर्दन की दिव्य गाथा है।
  • उत्तम चरित्र (अध्याय 5 से 13): इस चरित्र की अधिष्ठात्री देवी महासरस्वती हैं। इसमें शुम्भ-निशुम्भ, धूम्रलोचन, चण्ड-मुण्ड और रक्तबीज के संहार तथा सुरथ-समाधि को वरदान प्राप्ति का वर्णन है।

सप्तशती पाठ के आवश्यक अंग (षडंग)

परंपरागत विधि से सप्तशती का पाठ करते समय मुख्य अध्यायों के आरंभ और अंत में कुछ विशेष स्तोत्रों का पाठ किया जाता है:

  1. देवी कवच: शरीर और जीवन के प्रत्येक अंग की रक्षा हेतु ब्रह्मा जी द्वारा उपदिष्ट कवच।
  2. अर्गला स्तोत्र: माँ भगवती के रूप, जय और यश की स्तुति।
  3. कीलक स्तोत्र: महर्षि व्यास द्वारा रचित स्तोत्र, जो पाठ के कीलन को खोलता है।
  4. नवार्ण मंत्र जप: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का यथाशक्ति जप (कम से कम 108 बार)।
  5. रात्रि सूक्त / देवी सूक्त: वेदोक्त तथा तंत्रोक्त सूक्तों का पाठ।
  6. सिद्ध कुंजिका स्तोत्र एवं क्षमा प्रार्थना: पाठ समाप्ति पर त्रुटियों की क्षमा हेतु।

नवरात्रि में 9 दिन का पाठ क्रम (अध्याय विभाजन)

यदि साधक एक दिन में संपूर्ण सप्तशती का पाठ नहीं कर पाते हैं, तो नवरात्रि के नौ दिनों में प्रति दिन निर्धारित अध्यायों का पाठ करने की सुगम व्यवस्था है:

दिन (तिथि) पढ़ा जाने वाला अध्याय / अंश मुख्य कथा / विषय
पहला दिन (प्रतिपदा) कवच, अर्गला, कीलक + प्रथम अध्याय मधु-कैटभ वध एवं महाकाली प्राकट्य
दूसरा दिन (द्वितीया) दूसरा और तीसरा अध्याय महिषासुर की सेना का संहार
तीसरा दिन (तृतीया) चौथा अध्याय इन्द्रादि देवताओं द्वारा देवी स्तुति
चौथा दिन (चतुर्थी) 5वाँ, 6वाँ, 7वाँ और 8वाँ अध्याय धूम्रलोचन, चण्ड-मुण्ड और रक्तबीज वध
पाँचवाँ दिन (पंचमी) 9वाँ और 10वाँ अध्याय निशुम्भ और शुम्भ वध
छठा दिन (षष्ठी) 11वाँ अध्याय नारायणी स्तुति एवं देवी के भविष्य अवतार
सातवाँ दिन (सप्तमी) 12वाँ अध्याय सप्तशती पाठ का फल-माहात्म्य
आठवाँ दिन (अष्टमी) 13वाँ अध्याय + रहस्य त्रय राजा सुरथ और वैश्य को वरदान प्राप्ति
नौवाँ दिन (नवमी) सिद्ध कुंजिका, आरती, क्षमा प्रार्थना व कन्या पूजन सप्तशती पाठ की पूर्णता व हवन

पाठ करने के मुख्य नियम व सावधानियाँ

  • आसन एवं शुद्धि: कुशा अथवा ऊन के लाल/पीले आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • पुस्तक की मर्यादा: पुस्तक को सीधे भूमि पर या हाथ में लटका कर न रखें; उसे काष्ठ के पटरे, चौकी अथवा ग्रन्थ-पीठ (रेहल) पर रेशमी वस्त्र बिछाकर रखें।
  • स्पष्ट उच्चारण: शब्दों को न तो बहुत शीघ्रता से बोलें और न ही अत्यधिक धीमे। प्रत्येक अक्षर का उच्चारण शुद्ध होना चाहिए।
  • क्षमा प्रार्थना: पाठ के अंत में अनजाने में हुई भूल-चूक के लिए “अपराधक्षमापन स्तोत्र” अथवा हिंदी में क्षमा प्रार्थना अवश्य करें।
दैनिक सरल पाठ: यदि विस्तृत सप्तशती पाठ का समय न हो, तो प्रतिदिन शांत मन से श्री दुर्गा चालीसा का पाठ और माँ दुर्गा के मंत्रों का जप भी माता की कृपा प्राप्ति का सरल व श्रेष्ठ माध्यम है।

दुर्गा सप्तशती से जुड़े सामान्य प्रश्न

दुर्गा सप्तशती का सबसे पावरफुल मंत्र कौन सा है?

दुर्गा सप्तशती में सबसे प्रभावशाली महामंत्र “नवार्ण मंत्र” (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) माना गया है। इसके अतिरिक्त सर्वबाधा निवारण हेतु “सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥” को अत्यंत शक्तिशाली माना गया है।

दुर्गा सप्तशती में कौन से मंत्र हैं?

दुर्गा सप्तशती में 700 श्लोक रूपी मंत्र हैं, जिन्हें 'सप्तशती' कहा जाता है। इसके अलावा कवच, अर्गला, कीलक, नवार्ण मंत्र, देवी सूक्त, रात्रि सूक्त तथा सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के दिव्य मंत्र शामिल हैं।

दुर्गा सप्तशती का पाठ किस दिन कौन सा अध्याय करना चाहिए?

नवरात्रि के 9 दिनों में पाठ को ऊपर दी गई सारणी के अनुसार विभाजित किया जाता है: प्रतिपदा को प्रथम अध्याय; द्वितीया को दूसरा व तीसरा; तृतीया को चौथा; चतुर्थी को 5वाँ से 8वाँ अध्याय; पंचमी को 9वाँ व 10वाँ; षष्ठी को 11वाँ; सप्तमी को 12वाँ; अष्टमी को 13वाँ अध्याय व रहस्य; तथा नवमी को हवन, आरती व क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए।

दुर्गा सप्तशती के 7वें अध्याय में क्या लिखा है?

7वें अध्याय में माँ दुर्गा के ललाट से अत्यंत उग्र स्वरूपा देवी 'कालिका' के प्राकट्य और असुर सेनापति चण्ड तथा मुण्ड के संहार की रोमांचक कथा का वर्णन है। चण्ड-मुण्ड का वध करने के कारण ही माता का नाम 'चामुण्डा' पड़ा।

शत्रु नाश के लिए दुर्गासप्तशती का मंत्र क्या है?

शत्रु बाधा और संकट निवारण हेतु 11वें अध्याय का यह मंत्र सिद्ध माना गया है: “सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥” इसका जप नियमित रूप से करने से भय और विरोधियों के षड्यंत्र निष्फल होते हैं।

दुर्गा सप्तशती का कौन सा पाठ रोज करना चाहिए?

यदि प्रतिदिन 13 अध्यायों का पाठ संभव न हो, तो नित्य पूजा में देवी कवच, अर्गला स्तोत्र, कीलक और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ रोज करना चाहिए। इसके साथ दुर्गा चालीसा का पाठ भी अत्यंत सुलभ और शुभ है।

दुर्गा सप्तशती में सबसे पहले क्या पढ़ना चाहिए?

पाठ क्रम में सबसे पहले शापोद्धार व उत्कीलन के बाद “श्री देवी कवच”, उसके बाद “अर्गला स्तोत्र”, फिर “कीलक स्तोत्र” और “नवार्ण मंत्र” का जप करना चाहिए। इसके उपरांत मुख्य अध्यायों का पाठ आरंभ होता है।

दुर्गा अष्टमी के दिन कौन सा मंत्र का जाप करना चाहिए?

महाअष्टमी के पावन दिन नवार्ण मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” अथवा महागौरी ध्यान मंत्र “श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥” का जप करना विशेष फलदायी है।

माँ दुर्गा का प्रिय मंत्र कौन सा है?

माँ दुर्गा का अत्यंत प्रिय और सरल मूल मंत्र “ॐ दुं दुर्गायै नमः” तथा सिद्ध नवार्ण मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” है।

माता की चौकी कब उठानी चाहिए?

नवरात्रि में स्थापित माता की चौकी को नवमी पूजा, हवन और कन्या पूजन संपन्न होने के बाद अथवा दशमी तिथि (विजयादशमी) के दिन प्रातः शुभ मुहूर्त में कलश और मूर्तियों का विसर्जन व प्रणाम करके सम्मानपूर्वक उठाना चाहिए।

दुर्गा सप्तशती का पाठ एक दिन में कितने अध्याय करना चाहिए?

यदि नवाह्निक (9 दिन) का संकल्प न हो, तो एक दिन में पूरे 13 अध्यायों का एक बैठक में पाठ किया जा सकता है। यदि समय कम हो, तो एक-एक चरित्र (जैसे प्रथम चरित्र या मध्यम चरित्र) के अनुसार भी पाठ किया जा सकता है।

दुर्गा सप्तशती का पाठ शाम को कितने बजे करना चाहिए?

सप्तशती का पाठ सायंकाल में सूर्यास्त के समय यानी गोधूलि वेला या प्रदोष काल (लगभग शाम 6:00 से 8:00 बजे के बीच) में दीपक जलाकर करना अत्यंत शुभ माना जाता है। रात्रि सूक्त और देवी कवच का पाठ रात्रि में भी किया जा सकता है।

दुर्गा सप्तशती का 8वां अध्याय क्या है?

8वें अध्याय में दैत्यराज 'रक्तबीज' के संहार की अत्यंत प्रसिद्ध गाथा है। रक्तबीज के रक्त की एक बूँद भूमि पर गिरने से अनेक दैत्य उत्पन्न हो जाते थे, तब माँ चामुण्डा ने खप्पर में उसका सारा रक्त पीकर उसका पूर्ण संहार किया था।

दुर्गा सप्तशती के कौन से सिद्ध चमत्कारी मंत्र हैं?

सप्तशती के सिद्ध संपुट मंत्रों में: कल्याण हेतु “सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये...”, विपत्ति नाश हेतु “शरणागतदीनार्त...”, रोग-मुक्ति हेतु “रोगानशेषानपहंसि तुष्टा...”, और आरोग्य-सौभाग्य हेतु “देहि सौभाग्यमारोग्यं...” प्रमुख सिद्ध मंत्र हैं।

दुर्गा सप्तशती के कितने अध्याय पढ़ने चाहिए?

दुर्गा सप्तशती में कुल 13 अध्याय होते हैं। पूर्ण पाठ में पूरे 13 अध्याय पढ़े जाने चाहिए। यदि समय का अभाव हो तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करने से भी संपूर्ण सप्तशती के पाठ का पुण्य फल प्राप्त होता है।